मनोबोध श्लोक ३५ वा (असे हो जया अंतरी भाव जैसा )
असे हो जया अंतरी भाव जैसा | वसे हो तया अंतरी देव तैसा | अन्न्यास रक्षीतसे चापपाणी | नुपेक्षि कदा र…
असे हो जया अंतरी भाव जैसा | वसे हो तया अंतरी देव तैसा | अन्न्यास रक्षीतसे चापपाणी | नुपेक्षि कदा र…
अहल्या शिळा राघवे मुक्त केली | पदी लागता दिव्य होउनि गेली | जया वर्णिता शीनली वेद वाणी | नुपेक्षी …
उपेक्षा कदा राममरूपी असेना | जीवा मानवा निश्चयों तो वसेना | शिरी भार वाहेन बोले पुराणी | नुपेक्षि क…
वसे मेरुमांदार सॄष्टिलिला | शशि सूर्य तारांगणे मेघमाळा | चिरंजीव केले जनी दास दोन्ही | नुपेक्षी कदा…
महासंकटी सोडिले देव जेणे | प्रताबे बळे आगळा सर्वगुणे | जयाते स्मरे शैलजा शूळपाणी | नुपेक्षी कदा राम…