जब दुख का साया छाये, सीताराम गाइये (हिंदी भजन)

॥ सीताराम गाइये ॥

जब दुख का साया छाये, सीताराम गाइये
जब कुछ भी समझ ना आए, सीताराम गाइये
सीताराम गाइये, सीताराम गाइये
सीताराम गाइये, सीताराम गाइये
सीताराम...... ॥ धृ ॥

दो दिन का ये मेला है, फिर लौट के हमे जाना है
माया का ये जाल सारा, झूठा ताना बाना है
जब ये बात समझ आ जाये, सीताराम गाइये
सीताराम गाइये, सीताराम गाइये

सीताराम गाइये, सीताराम गाइये

सीताराम...... ॥ १ ॥

ये अपना कहने वाले, अपने कहाँ होते है
मुश्किल में सबसे पहले, यही दूर होते हैं
जब अपने तुम्हें रुलाये, सीताराम गाइये
सीताराम गाइये, सीताराम गाइये
सीताराम गाइये, सीताराम गाइये
सीताराम...... ॥ २ ॥

जब मन भारी हो जाए, सीताराम गाइये
जब तन भारी हो जाए, सीताराम गाइये
सीताराम गाइये, सीताराम गाइये
सीताराम गाइये, सीताराम गाइये
सीताराम...... ॥ ३ ॥

॥ भजन का संपूर्ण अर्थ ॥
ध्रुवपद:
जब जीवन में दुखों का साया (अंधकार) छा जाए और जब कुछ भी समझ में न आए कि क्या करना चाहिए और क्या नहीं, तब सब चिंताएं छोड़कर केवल 'सीताराम' का नाम जपना चाहिए।

कडवे १:
जब चिंताओं के कारण मन भारी हो जाए, तब सीताराम गाइये। यह संसार केवल दो दिन का मेला (अस्थायी) है, अंत में हमें वापस (परमात्मा के पास) ही जाना है। यह सारा संसार माया का जाल है और दुनियादारी का यह ताना-बाना पूरी तरह से झूठा है। जब जीवन की यह वास्तविकता आपको समझ आ जाए, तब केवल 'सीताराम' का नाम गाइये।

कडवे २:
इस दुनिया में जो लोग खुद को 'अपना' कहते हैं, वे वास्तव में अपने नहीं होते। जब हम पर कोई मुश्किल या संकट आता है, तो सबसे पहले यही 'अपने' कहलाने वाले लोग हमसे दूर हो जाते हैं। इसलिए जब आपके अपने ही आपको दुख दें या रुलाएं, तब इंसानों से शिकायत करने के बजाय अपने मन को शांत करने के लिए भगवान 'सीताराम' का भजन गाइये।

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